Essay on Patriotism in Hindi | देशभक्ति पर निबंध

Essay on Patriotism in Hindi | देशभक्ति पर निबंध

देशभक्ति पर निबंध Essay on Patriotism in Hindi : ” पत्थर की मूरतों मे समझा है तू खुदा है, खाके-वतन का मुझको हर जर्रा देवता है।”  – इकबाल 

जन्म लेने के बाद ही जिस धरती माता ने अपनी दुलार-भरी गोद में चिपका लिया, भला ऐसा कौन पापी होगा जो उसके प्रति प्रेम ना व्यक्त करेगा!

सच्चा देशभक्त अपना तन, मन, धन – सब कुछ अपने देश पर न्योछावर कर देता है। उसे इसके लिए कुछ भी होम करने में हिचक नहीं होती। उसे न तो वनिता की ममता होती है, न सुत का स्नेह खींचता है। उसे न राजभवन का सुख लुभाता है, न तलवार की नोक की चुभन ही सताती है। वह मंसूर की तरह ‘ अनलहक’ न कहकर, ‘ मातृभूमि’ की ही रट लगाता है। उसकी अभिलाषा माखनलाल चतुर्वेदी के ‘पुष्प की अभिलाषा’ – सी होती है –



 ” मुझे तोड़ लेना वनमाली-उस पथ पर देना तुम फेंक, मातृभूमी पर शीश चढ़ाने – जिस पथ जावें वीर अनेक।”

हर देश का इतिहास ऐसे देशभक्तों की अमर कथाओं से उजागर है। हमारे देश के इतिहास में महाराणा प्रताप, तत्रपति शिवाजी, महारानी लक्ष्मीबाई, खुदिराम बोस, पंडिय चन्द्रशेखर आजाद, सरदार भगत सिंह, लोकमान्य बालगंगाधर तिलक, वीर सावरकर, महात्मा गाँधी, नेताजी सुभाषचन्द्र बोस इत्यादि के नाम स्वर्णक्षरों में लिखें हैं। ऐसे वीरों का रक्त स्वतंत्रता- वृक्ष के बीज का काम करता रहा है।

‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ ( जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं ) के मनाने वाले देशभक्तों की सुगंधि से कोई भी राष्ट्र सुवासित होता है। उनकी सुगंध तो ऐसे मलगिरि – चंदन की सुगंध है, जो पास मे रहनेवाले निर्गंध निस्सार वेणुविटपो को भी सुगंधित कर देती है। जो देश के लिए आत्मबलिदान करता है, उसे देश देवता की तरह पूजता है, उसके गुणों का कीर्तन करता है और उसकी स्मृति में उत्सव मनाता है –

 “शहीदों की मजारों पर लगेंगे हर बरस मेले।, वतन पै मरनेवालों का यही बाकी निशाँ होगा।”